Saturday, June 25, 2011

YouTube - Astrology Show In Bhojpuri " Greh Gochar" on Mahua Entertainment.

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YouTube - Celebrity Astrologer Pandit Vaibhava Nath Sharma Explaining Importance of 'Guru Pushya Yog'.

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YouTube - Astrology Show In Bhojpuri " Greh Gochar" on Mahua Entertainment by Celebrity Astrologer.

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वास्तु अनुसार कैसा हो घर का प्रवेश द्वार...ध्यान रखने योग्य कुछ बाते....


जिस प्रकार मनुष्य के शारीर में रोग के प्रविष्ट करने का मुख्य मार्ग मुख होता है उसी प्रकार किसी भी प्रकार की समस्या के भवन में प्रवेश का सरल मार्ग भवन का प्रवेश द्वार ही होता है इसलिए इसका वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व है।गृह के मुख्य द्वार को शास्त्र में गृहमुख माना गया है। यह परिवार व गृहस्वामी की शालीनता, समृद्धि व विद्वत्ता दर्शाता है। इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा अन्य द्वारों की अपेक्षा प्रधान, वृहद् व सुसज्जित रखने की प्रथा रही है। पौराणिक भारतीय संस्कृति व परम्परानुसार इसे कलश, नारियल व पुष्प, अशोक, केले के पत्र से या स्वास्तिक आदि से अथवा उनके चित्रों से सुसज्जित करने की प्रथा है | जो आज के इस अध्युनिक युग के शहरी जीवन में भोग, विलासिता के बीच कही विलुप्त सी हो गई है | मुख्य द्वार चार भुजाओं की चौखट वाला होना अनिवार्य है। इसे दहलीज भी कहते हैं। यह भवन में निवास करने वाले सदस्यों में शुभ व उत्तम संस्कार का संगरक्षक व पोषक है | पुरानी मान्यता के अनुसार ऐसे भवन जिनमे चौखट या दहलीज न हो उसे बड़ा अशुभ संकेत मानते थे, मान्यता है की माँ लक्ष्मी ऐसे घर में प्रवेश ही नहीं करती जहाँ प्रवेश द्वार पर चौखट न हो और ऐसे घर के सदस्य संस्कारहीन हो जाते है | इसकी दूसरी अनिवार्यता यह है की इससे भवन में गंदगी भी कम प्रवेश कर पाती है तथा नकारात्मक उर्जाओ या किसी शत्रु द्वारा किया गया कोई भी नीच कर्म भी भवन में प्रवेश नहीं कर पाता | चौखट अथवा दहलीज पुरातनकाल से ही हमारे संस्कार व जीवनशैली का एक प्रमुख अंग रही है | इनपर कितने सारे क्षेत्रीय मुहावरे, लोकौक्तिया आधारित है |

- यदि आपका मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर अथवा पूर्व में है तो इसे हरे व पीले, गुलाबी रंग से रंगवाना शुभ होगा यदि यह दक्षिण है तो लाल और पश्चिम है तो हल्का नीला, भूरा, सफ़ेद रंग प्रयोग कर सकते है यह वास्तु सम्मत है |

- प्रातः मुख्य द्वार खोल कर सर्वप्रथम दहलीज पर जल छिड़कना चाहिए जिससे रात में वहां एकत्रित हुई दूषित ऊर्जा दूर हो जाएं तथा गृह में प्रवेश ना पाए और लक्ष्मी आने का मार्ग प्रशस्त हो |

- मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों तरफ (अगल बगल) व ऊपर रोली, कुमकुम, हल्दी, केसर आदि घोलकर स्वास्तिक व ओमकार (ॐ ) का शुभ चिन्ह बनाएं।

- मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर अपने सामर्थानुसार रंगोली बनाना या बनवाना शुभ होता है जो माँ लक्ष्मी को आकृष्ट करता है व नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवेश को रोकता है।

-मुख्य द्वार को कलश, नारियल, पुष्प, अशोक व केले के पत्र से या स्वास्तिक आदि से सुसज्जित रखने का प्रयास करे जिससे यह अन्य द्वारो से भिन्न व विशेष दिखे |

- मुख्य द्वार चार भुजाओं की चौखट वाला होना अनिवार्य है। जिससे घर में संस्कार बने रहते है और माँ लक्ष्मी भी ऐसे ही घर में प्रवेश करती है|

- घर के सदस्यों व गृह लक्ष्मी की ज़िम्मेदारी है की सूर्योदय उपरांत ही मुख्य द्वार को साफ़ सुथरा व सुसज्जित रखे |

Friday, June 24, 2011

आग्नेय कोण में क्या करे और क्या न करे....?

भवन की आग्नेय दिशा अर्थात पूर्व दक्षिण का कोना अग्नि का स्थान है जिसके स्वामी दैत्य गुरु श्री शुक्राचार्य है परन्तु अग्नि का स्थान होने से मंगल देव का भी समान आधिपत्य है | 
क्या हो- 
- यह स्थान भवन में रसोई का सबसे उपयुक्त स्थान है | जिसमे भोजन पूर्व दिशा की तरफ मुख कर बनाया जाये |
- यहाँ पर विद्युत उपकरण आदि भी  रखे जा सकते है |
- यह स्थान भवन में ईशान और वायव्य से ऊंचा लेकिन नैऋत्य से नीचा रहना चाहिए | 
- जेनेरेटर, इन्वेर्टर, बिजली का मीटर आदि यहाँ रखे |
- यदि संयुक्त परिवार है और घर में बच्चे भी परिवार वाले विवाहित है तो घर के छोटे बेटे का कमरा यहाँ  बना सकते है |

क्या न हो- 
- आग्नेय कोण का किसी भी दिशा में बढ़ना शुभ नहीं होता, इसलिए इसे संशोधित कर वर्गाकार या आयताकार कर लेना चाहिए | 
- यहाँ कभी भी जलस्थान या बोरिंग नहीं होनी चाहिए | ऐसा होने पर यह स्थान बेहद मारक प्रभाव देने लगता है | 
-  यहाँ कभी भी सेप्टिक टेंक नहीं होनी चाहिए |
- यह स्थान कभी भी खुला नहीं छोड़ना चाहिए |
- यह स्थान घर में सबसे ऊँचा भी न हो |
- इस स्थान पर स्टोर भी न बनाये |

नैऋत्य दिशा में क्या हो, क्या न हो....?

नैऋत्य (दक्षिण - पश्चिम का कोना) कोण वास्तु में राहु केतु की दिशा बताई गई है | नैऋत्य कोण के बढ़े होने से असहनीय स्वस्थ्य पीड़ा व अन्य गंभीर परेशानियां पैदा होती हैं और यदि यह खुला रह जाये तो ना ना प्रकार की समस्या घर कर जाती है इसलिए इस स्थान का किसी भी परिस्थिति में खुला या बढ़ा हुआ नहीं होना चाहिए | इस स्थान में दोष होना घर पर प्रेत बढाओ व शक्तियों को भी आमंत्रित करता है तथा परिवार के जो पितृ देवता है उनकी भी कृपा नहीं मिलती अथवा यह पितृदोष का भी सूचक है | 

क्या हो-
- सदैव ही इस स्थान का ऊँचा व भारी होना बहुत ही आवश्यक है | 
- यह स्थान घर के वरिष्ट व्यक्ति व प्रधान कक्ष का स्थान होता है | 
- यह स्थान शौचालय, स्टोर व भारी सामान के भण्डार के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है |
- इस स्थान पर आवश्यकता पड़ने पर जल भण्डारण (ओवर हेड टंक) की व्यस्था की जा सकती है |
- यह स्थान शौचालय के लिए भी उपयुक्त है |
 
क्या न हो-
- गलती से भी इस कोने में कोई बोरिंग, गड्ढा नहीं होना चाहिए | 
- बच्चो या मेहमानों अथवा किरायेदारो को इस दिशा में स्थान कदापि न दे |
- इस स्थान को बिलकुल भी खुला व मालिक से रहित न छोड़े |
- यहाँ लान, पार्क या बगीचा न बनाये |
- यहाँ बिजली से सम्बंधित उपकरण रखने से बचना चाहिए |

पश्चिम दिशा में क्या हो, क्या न हो...?

कही पश्चिम दिशा का वास्तु दोष तो आप की उन्नति में बाधक नहीं...?
हानिकारक है पश्चिम दिशा का बढ़ना या खुला होना...?
यदि भवन में पश्चिम दिशा जादा खुल या हलकी होगी तो घर में रहनेवालो को शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक समस्या बनी रहेगी क्यूंकि यह दिशा शनि देव तथा वरुण देव की दिशा है और सूर्य देव यहाँ अस्त होते है जिस अवस्था में सूर्य से सबसे जादा नकारात्मक उर्जा उत्सर्जित होती है और इसलिए इस दिशा को बंद व भरी रखने का विधान है | जितना इस दिशा का खुला होना नुक्सान दायक है उतना ही घटना या बढ़ना भी |


क्या हो-
- क्यूंकि यह स्थान वरुण देवता का भी है तो यहाँ ओवरहेड रखने का स्थान बनाये |
- इसके आलावा यहाँ स्टोर का स्थान भी उत्तम है |
- भोजन कक्ष का स्थान भी उत्तम है |
- अन्न भंडार का स्थान भी उत्तम है |
- गौ शाला यहाँ सबसे अच्छी मानी गई है |
- वाहन रखने का स्थान सबसे उत्तम है |

क्या न हो-
- यहाँ बच्चो को स्थान न दे |
- बिजली का मीटर यहाँ न हो |
- घर का प्रमुख व्यक्ति यहाँ न रहे |
- यहाँ पूजा स्थान न बनाये |
- कोई बोरिंग या कुआँ नहीं होना चाहिए |