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Thursday, June 16, 2011

क्या है....स्वस्थ सुन्दर, मेधावी, संस्कारी संतान प्राप्ति के सरल वास्तु उपाय....?


जिस किसी दंपत्ति को विवाह के वर्षो बाद स्वस्थ होने के बावजूद भी गर्भ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गर्भपात हो जाता है, इस समस्या या दोष का एक प्रमुख कारण कुंडली दोष अथवा पितृ दोष एवं घर का वास्तुदोष भी होता है।
1- यदि घर का आंगन पूर्व पश्चिम जादा लम्बा है तो वंश वृद्धि नहीं होती, आंगन का आयताकार उत्तर दक्षिण जादा होना या चौकोर होना आवश्यक है |  
2 - यदि घर की पूर्व दिश बाधित होगी तो भी सांतव वृद्धि में बाधा होती है और दक्षिण का खुला या हल्का होना बार बार संतान की हानि कराता है |
3 - यदि घर के दक्षिण पश्चिम (नैऋत्य ) और उत्तर पूर्व (इशान) में दोष होगा तो यह परिवार में पितृ दोष का सूचक है, ऐसी इस्थ्ती में भी संतान नहीं होती |  
4 - नव दंपत्ति को शुरु के कुछ काल लगभग एक वर्ष तक घर के उत्तर पश्चिम में रहना गर्भ धारण के लिए लाभकारी होता है |
5 - जिन दम्पतियों का विवाह हुए काफी समय हो गए और गर्भधारण अथवा संतान प्राप्त न हो रही हो तो उन्हें हमेशा घर के पश्चिम, दक्षिण पश्चिम  (नैऋत्य ) या दक्षिण दिशा का कमरा देना चाहिए।

6 - शयन कक्ष की उत्तर - पश्चिम दीवार पर धातु से बनी कोई सौम्य, सात्विक एवं आकर्षक वस्तु लगाएं।
7 - गर्भधारण के बाद  दक्षिण पश्चिम  (नैऋत्य ) में रहे व सोने की व्यस्था दक्षिण सर रख कर करे तथा संतान के जन्म तक बिस्तर की दिशा ना बदलें।

8 - कमरे के उत्तर - पश्चिम छोर पर बच्चों के समूह की तस्वीर टांगे। इससे सामान्य प्रसव में सहायता मिलती है।
9 - ऐसी स्त्री को माणिक या मूंगा पहनने से विशेष लाभ मिलता है।
10 - इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि गर्भ धारण करने के बाद उसके बिस्तर के नीचे की झाड़ू ना लगाएं।
11 - ऐसे काल में वृद्धो व गुरु की सेवा करे |
12 - हरिवंश पुराण का पाठ संतान गोपाल मंत्र का जाप तथा पितृ दोष निवारण घर में अवश्य कराये |