Wednesday, August 31, 2011

भाद्रपद मॉस शुक्ल पक्ष चतुर्थी पर कैसे करे गणेश पूजन...!!!


श्रीगणेश चतुर्थी विघ्नराज, मंगल कारक, प्रथम पूज्य, एकदंत भगवान गणपति के प्राकटय का उत्सव पर्व है। आज के युग में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मानव जाति को गणेश जी के मार्गदर्शन व कृपा की आज हमें सर्वाधिक आवश्यकता है। आज हर व्यक्ति का अपने जीवन में यही सपना है की रिद्धि सिद्धि, शुभ-लाभ उसे निरंतर प्राप्त होता रहे, जिसके लिए वह इतना अथक परिश्रम करता है | ऎसे में गणपति हमें प्रेरित करते हैं और हमारा मार्गदर्शन करते है की विषय का ज्ञान अर्जन कर विद्या और बुद्धि से एकाग्रचित्त होकर पूरे मनोयोग तथा विवेक के साथ जो भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु परिश्रम करे, निरंतर प्रयासरत रहे तो वह सफलता का वरण अवश्य करेगा | गणेश पुराण के अनुसार गणपति अपनी छोटी-सी उम्र में ही समस्त देव-गणों के अधिपति इसी कारण बन गए क्योंकि वे किसी भी कार्य को बल से करने की अपेक्षा बुद्धि से करते हैं। बुद्धि के त्वरित व उचित उपयोग के कारण ही उन्होंने पिता महादेव से वरदान लेकर सभी देवताओं से पहले पूजा का अधिकार प्राप्त किया |

गणेश स्थापना वर्ष 2011 का विशेष मुहूर्त
सुबह 6:20 से 7:50 तक- शुभ। 
दोपहर 12:20 से 1:30 तक- लाभ ।
संध्या (शाम) 4:50 से 6:20 तक- शुभ ।
इनके अतिरिक्त वृश्चिक लग्न में (सुबह 11:44 से दोपहर 1:30 ) तथा कुंभ लग्न में (शाम 5:52 से 7: 03) भी भगवान श्रीगणेश की स्थापना की जा सकती है क्योंकि यह दोनों स्थिर लग्न है। इन लग्नों में किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थाई होता है। आप इस का ध्यान रखे और लाभ उठाये।

कैसे करे गणपति पूजन 
सर्वप्रथम एक शुद्ध मिटटी या किसी धातु से बनी श्री गणेश जी की मूर्ति घर में लाकर स्थापित करे व मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाकर षोड्शोपचार से उनका पूजन करना चाहिए तथा दक्षिणा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाने का विधान है । इनमें से पांच लडडू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राम्हणों में बांट देना चाहिए। गणेश जी की पूजा सायंकाल के समय की जानी चाहिए जो उत्तम है। 


चन्द्र दर्शन निषेध 
'जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है | इस दिन चन्द्र दर्शन करने से भगवान श्री कृष्ण को भी मणि चोरी का कलंक लगा था । 
यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए- 
'सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥

गणपति पूजन में क्या करे क्या न करे तथा किन विशेष मंत्रो का करे जाप...!!!

गणपति पूजन में क्या करे क्या न करे-
 सर्वप्रथम यह जान ले की श्री गणेश जी को तुलसी दल नहीं चढ़ाना चाहिए | अस्तु गणेश पूजन में तुलसी दल का प्रयोग न करे |
भवन में कभी भी तीन गणेश की पूजा नहीं करनी चाहिए अर्थात घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित न हो |
गणेश आराधना में तुलसी की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए अर्थात किसी भी गणेश मंत्र को तुलसी की माला पर जाप न करे |


किन विशेष मंत्रो का करे जाप-
शास्त्रोक्त वचन अनुसार यह गणेश मंत्र त्वरित, चमत्कारिक, आर्थिक प्रगति व समृध्दिदायक, समस्त बाधाएं दूर करने वाला हैं।
ॐ गं गणपतये नमः ।

शत्रु द्वारा कि गई तांत्रिक क्रिया को नष्ट करने व विविध कामनाओं कि शीघ्र पूर्ति हेतु यह मंत्र लाभकारी है |
ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌ ।

आलस्य, निराशा, कलह, विघ्न दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप करे |
ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।

मंत्र जाप से कर्म बंधन, रोगनिवारण, समस्त विघ्न, कुबुद्धि, कुसंगत्ति, दूर्भाग्य, से मुक्ति होती हैं व आध्यात्मिक चेतना, धन प्राप्त होता है।
ॐ गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:।

सुख, सौभाग्य, रोजगार प्राप्ति व आर्थिक समृद्धि हेतु -
ॐ गूं नम:।

लक्ष्मी प्राप्ति एवं व्यवसाय बाधा निवारण हेतु -
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात।

समस्त विघ्नो, बाधाओं एवं संकटो के निवारण हेतु -
ॐ गीः गूं गणपतये नमः स्वाहा।
विवाह बाधा, त्रैलोक्य मोहन व सौभाग्य वृद्धि हेतु -
ॐ श्री गं सौभाग्य गणपत्ये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

दिव्य ज्ञान, मार्गदर्शन व सामाजिक प्रतिष्टा प्राप्ति हेतु -
ॐ वक्रतुण्डेक द्रष्टाय क्लीं हीं श्रीं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मं दशमानय स्वाहा ।

मुकदमे में सफलता प्राप्ति हेतु -
ॐ वर वरदाय विजय गणपतये नमः।

वाद-विवाद, कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति, शत्रु भय से मुक्ति हेतु -
ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्वगुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।

यात्रा में सफलता प्राप्ति हेतु -
ॐ नमः सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्व राज्य वश्य कारनाय सर्वजन सर्व स्त्री पुरुषाकर्षणाय श्री ॐ स्वाहा।
यह हरिद्रा गणेश साधना का चमत्कारी मंत्र हैं।
ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपत्ये वरद वरद सर्वजन हृदये स्तम्भय स्वाहा।

गृह कलेश निवारण एवं परिवार में सुखशान्ति कि प्राप्ति हेतु-
ॐ ग्लौं गं गणपतये नमः।
दरिद्रता नाश व धन प्राप्ति हेतु
ॐ गं लक्ष्म्यौ आगच्छ आगच्छ फट्।
व्यापार बाधा निवारण एवं व्यापर में निरंतर उन्नति हेतु-
ॐ गणेश महालक्ष्म्यै नमः।
असाध्य रोगों से मुक्ति हेतु-
ॐ गं रोग मुक्तये फट्।
मनोकामना पूर्ति हेतु- 
ॐ अन्तरिक्षाय स्वाहा।

उत्तम संतान प्राप्ति हेतु - 
गं गणपत्ये पुत्र वरदाय नमः।
ऋण मोचन हेतु - 
ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट ।

इस मंत्रों के अतिरिक्त गणपति अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत, गणेशकवच, संतान गणपति स्त्रोत, ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत, मयूरेश स्त्रोत, गणेश चालीसा का पाठ करने से गणेश जी की शीघ्र कृपा प्राप्त होती है ।

Thursday, June 30, 2011

भैरव साधना का अद्भुद चमत्कार

यदि आप किसी गंभीर समस्या में घिर जाये और चाहते हो त्वरित उपाय तो एक ऐसा उपाय जो जीवन पर छाए काले बादल को तुरंत मिटाए

- शनिवार और रविवार को श्री भैरव मंदिर में जाकर सिंदूर व चमाली के तेल का चोला अर्पित करे |
- शनिवार या रविवार को भैरव मंदिर में कपूर की आरती व काजल का दान करने से कष्ट मिटते है |
- किसी गंभीर समस्या के निवारण हेतु उरद की दाल के एक सो आठ बारे बना कर उसकी माला बनाये और श्री भैरवनाथ जी को अर्पित कर सदर उनकी आरती करे |
- पारिवारिक या न्यायिक विवाद के निदान हेतु सरसों का तेल, खोये से निर्मित मिस्ठान, काले वस्त्र, एक जलदार नारियल, कपूर, नीबू आदि समर्पित करे |
- उपरी बाधा निवारण हेतु भैरवाष्टक का नियमित आठ पाठ कर जल को फुक कर पीड़ित व्यक्ति को पिला दे | हर प्रकार की समस्या का निदान होगा |

पांच मिस्ठान करेगी चमत्कार

जब व्यक्ति किसी गंभीर समस्या में घिर जाये, जीवन में आगे बढ़ने का कोई मार्ग न दिखे, भविष्य अन्धकारमय दिखने लगे जब सारे मार्ग बंद हो जाये तो इस प्रयोग को करे |

यह प्रयोग बुधवार, शनिवार को मिलाकर कुल 11 बार करे :-

एक स्टील का लोटा लेकर उसमे दूध, जल, शहद, गुड, काला तिल मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर ले | फिर यह मिश्रण ले कर आस पास किसी पीपल के पेड़ पर जा कर पूरी श्रद्धा से अर्पित करे |
फिर वहां पांच अलग अलग प्रकार मिस्ठान पान के पत्ते पर अर्पित कर एक एक इलाइची, लौंग, सुपारी का भोग अर्पित करे और पूरी श्रद्धा से पांच सुगन्धित अगरबत्ती अर्पित कर साथ परिक्रमा पीपल देव की करे |
इस प्रयोग को करने से किसी भी प्रकार की बाधा होगी वह दूर हो जाएगी और आप सफलता का वरण कर सकेंगे |

अमरनाथ यात्रा का रहस्य व कथा

पुराणों में संस्मरण है कि एक बार माँ पार्वती ने बड़ी उत्सुकता के साथ बाबा श्री विश्वनाथ देवाधिदेव माहदेव से यह प्रश्न किया की ऐसा क्यूँ होता है की आप अजर अमर है और मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरुप में आकर फिर से वर्षो की कठोर तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना होता है | जब मुझे आपको ही प्राप्त करना है तो फिर मेरी यह तपस्या क्यूँ...? मेरी इतनी कठोर परीक्षा क्यूँ....? और आपके कंठ में पड़ी यह नरमुण्ड माला तथा आपके अमर होने का कारण व रहस्यक्या है...? महाकाल ने पहले तो माता को यह गूढ़ रहस्य बताना उचित नहीं समझा परन्तु माता की स्त्री हठ के आगे उनकी एक न चली | तब अन्त्त्वोगत्व्या महादेव शिव को माँ पार्वती को अपनी साधना की अमर कथा जिसे हम अमरत्व की कथा के रूप में जानते है इसी परम पावन अमरनाथ की गुफा में कही | अमरनाथ यात्रा हिन्दी मास के आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास की पूर्णिमा तक होती है, जो अंग्रेजी माह जुलाई से अगस्त तक लगभग ४५ दिन तक चलती है। भगवान शंकर ने माँ पार्वती जी से एकान्त व गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनने को कहा जिससे कि अमर कथा को कोई भी जीव, व्यक्ति और यहां तक कोई पशु-पक्षी भी न सुन ले। क्योंकि जो कोई भी इस अमर कथा को सुन लेता, वह अमर हो जाता। इस कारण शिव जी पार्वती को लेकर किसी गुप्त स्थान की ओर चल पड़े। सबसे पहले भगवान भोले नें अपनी सवारी नन्दी को पहलगाम पर छोड़ दिया, इसीलिए बाबा अमरनाथ की यात्रा पहलगाम से शुरू करने का तात्पर्य या बोध होता है। आगे चलने पर शिव जी ने अपनी जटाओं से चन्द्रमा को चंदनवाड़ी में अलग कर दिया तथा गंगा जी को पंचतरणी में और कंठाभूषण सर्पों को शेषनाग पर छोड़ दिया, इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा। आगे की यात्रा में अगला पड़ाव गणेश टॉप पड़ता है, इस स्थान पर बाबा ने अपने पुत्र गणेश को भी छोड़ दिया था, जिसको महागुणा का पर्वत भी कहा जाता है। पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी त्याग दिया। इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को भी अपने से अलग कर दिया। इसके बाद मां पार्वती संग एक गुप्त गुफा में प्रवेश कर गये। कोई व्यक्ति, पशु या पक्षी गुफा के अंदर प्रवेश कर अमर कथा को न सुन सके इसलिए शिव जी ने अपने चमत्कार से गुफा के चारों ओर आग प्रज्जवलित कर दी। फिर शिव जी ने जीवन की अमर कथा मां पार्वती को सुनाना शुरू किया। कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई और वह सो गईं जिसका शिव जी को पता नहीं चला. भगवन शिव अमर होने की कथा सुनाते रहे | इस समय दो सफेद कबूतर श्री शिव जी से कथा सुन रहे थे और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे. शिव जी को लग रहा था कि माँ पार्वती कथा सुन रही हैं और बीच-बीच में हुंकार भर रहीं हैं. इस तरह दोनों कबूतरों ने अमर होने की पूरी कथा सुन ली. 
कथा समाप्त होने पर शिव का ध्यान पार्वती की ओर गया जो सो रही थीं | शिव जी ने सोचा कि पार्वती सो रही हैं तब इसे सुन कौन रहा था | तब महादेव की दृष्टि तब कबूतरों पर पड़ी, महादेव शिव कबूतरों पर क्रोधित हुए और उन्हें मारने के लिए तत्पर हुए | इस पर कबूतरों ने शिव जी कहा कि हे प्रभु हमने आपसे अमर होने की कथा सुनी है यदि आप हमें मार देंगे तो अमर होने की यह कथा झूठी हो जाएगी | इस पर शिव जी ने कबूतरों को जीवित छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप निवास करोगो | 

अत: यह कबूतर का जोड़ा अजर अमर हो गया। माना जाता है कि आज भी इन दोनों कबूतरों का दर्शन भक्तों को यहां प्राप्त होता है | और इस तरह से यह गुफा अमर कथा की साक्षी हो गई व इसका नाम अमरनाथ गुफा पड़ा। जहां गुफा के अंदर भगवान शंकर बर्फ के प्रकृति द्वारा निर्मित शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। पवित्र गुफा में मां पार्वती के अलावा गणेश के भी अलग से बर्फ से निर्मित प्रतिरूपों के भी दर्शन करे जा सकते हैं। इस पवित्र गुफा की खोज के बारे में पुराणों में भी एक कथा प्रचलित है कि एक बार एक गड़रिये को एक साधू मिला, जिसने उस गड़रिये को कोयले से भरी एक बोरी दी। जिसे गड़रिया अपने कन्धे पर लाद कर अपने घर को चल दिया। घर जाकर उसने बोरी खोली। वह आश्चर्यचकित हुआ, क्योंकि कोयले की बोरी अब सोने के सिक्कों की हो चुकी थी। इसके बाद वह गड़रिया साधू से मिलने व धन्यवाद देने के लिए उसी स्थान पर गया, जहां पर वह साधू से मिला था। परंतु वहां पर उसे साधू नहीं मिला, बल्कि उसे ठीक उसी जगह एक गुफा दिखाई दी। गड़रिया जैसे ही उस गुफा के अंदर गया तो उसने वहां पर देखा कि भगवान भोले शंकर बर्फ के बने शिवलिंग के आकार में स्थापित थे। उसने वापस आकर सबको यह कहानी बताई। और इस तरह भोले बाबा की पवित्र अमरनाथ गुफा की खोज हुई और धीरे-धीरे करते दूर-दूर से भी लोग पवित्र गुफा एवं बाबा के दर्शन को पहुंचने लगे जो आज तक प्रतिवर्ष जारी है |

श्री अमरनाथ जी के दर्शन से लाभ:-
बाबा अमरनाथ दर्शन का महत्व पुराणों में भी मिलता है। पुराण अनुसार काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देनेवाले श्री अमरनाथ के दर्शन है।

घोड़े की नाल के दस चमत्कारी प्रयोग

घोड़े की नाल के दस प्रयोग :-

काले घोड़े की नाल एक ऐसी वास्तु है जो शनि समबधित किसी भी पीड़ा जैसे शनि की अशुभ दशा, ढैया, साढ़ेसाती शनि का कोई अशुभ योग आदि..हर पीड़ा में सामान रूप से चमत्कारी है बशर्ते यह पूर्ण रूपेण सिद्ध हो....यहाँ सिद्ध से आशय पहले काले घोड़े के प्रयोग में हो फिर शुभ महूर्त में शनि मंत्रो से व वैदिक प्रक्रिया द्वारा प्रतिष्ठित की गई हो | सिद्ध या उर्जावान काले घोड़े की नाल को परखने का एक बहुत ही प्रमाणिक तरीका है | उसे आप कुछ घंटो (कम से कम ५ से ८ घंटे) के लिए मक्के में रख दिया जाये और फिर जब कुछ समय बाद देखा जाये तो सही सिद्ध घोड़े की नाल उस मक्के को लावे में बदल चुकी होगी अर्थात उसे पका देगी....|

१- काले वस्त्र में लपेट कर अनाज में रख दो तो अनाज में वृद्धि हो |
२- काले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रख दो तो धन में वृद्धि हो |
३- अंगूठी या छल्ला बनाकर धारण करे तो शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिले |
४- द्वार पर सीधा लगाये तो दैवीय कृपा मिले |
५- द्वार पर उल्टा लगाओ तो भूत, प्रेत, या किसी भी तंत्र मंत्र से बचाव हो |
६- शनि के प्रकोप से बचाव हेतु काले घोड़े की नाल से बना छल्ला सीधे हाथ में धारण करें।
७- काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर में चारो पायो में लगा दे |
८- काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के घर के चारो कोने पे लगाये |
९- काले घोड़े की नाल से एक कील बनाकर सवा किलो उरद की दाल में रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे |
१०- काले घोड़े की नाल से एक कील या छल्ला बनवा ले, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर कर है छल्ला या कील डाल कर अपना मुख देखे और पीपल के पेड़ के नीचे रख दे | 

1 जुलाई 2011 को सूर्य ग्रहण ---- क्या करे...? क्या न करे...?


आषाढ़ मॉस की अमावस्या को पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण दोपहर 1:24 बजे से शुरू होगा और 2:55 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण आर्द्रा नक्षत्र में लगेगा | इस ग्रहण से विशेषकर वृषभ, मिथुन, कर्क राशी अनिष्टकारी प्रभाव से प्रभावित होंगे अत: भारतवर्ष की कुंडली अनुसार वृषभ राशी है जिस कारण राष्ट्र में आगामी भविष्य में दैवीय, प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, आंधी, तूफान व भूकंप के खतरे भी बनने लगे हैं। राजनितिक संकट गहरा सकते है | दुर्घटनाएँ आदि होने की आशंका है | यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, लेकिन फिर भी इसके प्रभाव भारत में अवश्य देखने को मिलेंगे। क्यूंकि इस ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं है तो यहाँ पर सूतक आदि का विचार नहीं किया जाएगा | फिर भी ग्रहण काल में स्नान तथा दान करना लाभ देगा | अमूमन सूर्यग्रहण का सूतक 12 घण्टे पहले से आरम्भ हो जाता है तो इस प्रकार सूतक काल सुबह से ही आरम्भ माना जा सकता है | ग्रहण के समय शुभ कार्य करना वर्जित होता है | इस सूर्यग्रहण के समय सूर्य का केवल 10 फीसदी भाग ही ग्रहण के प्रभाव में रहेगा अर्थात 10 फीसदी भाग ही कटा हुआ नजर आएगा |



मेष:- रुके हुए व व्यापारिक कार्यो में लाभ संभव साथ ही स्वस्थ्य की समस्या रहेगी |
क्या करे - महामृतुन्जय मंत्र जा जाप करे |
क्या न करे- असमय भोजन न करे |


वृषभ:- परिवार में भाई बन्धु से वाद विवाद संभव | मगलिक व धार्मिक कार्यो से लाभ होगा |
क्या करे - महादेव शिव पर जल चढ़ाये |
क्या न करे- तर्क - कुतर्क न करे |


मिथुन:- कार्यक्षेत्र में उच्चाधाकरी से तनाव व व्यापार में सरकारी तंत्र से बाधा हो सकती है |
क्या करे - हनुमद आराधना करे |
क्या न करे- जादा तनाव न ले |


कर्क:- परिवार व स्वस्थ्य से कष्ट ही मिलेगा | अत: सावधान रहे |
क्या करे - सोच समझ कर बात करे |
क्या न करे- विवाद से बचे |


सिंह:- कार्यक्षेत्र , व्यापार में सफलता, अचानक यात्रा से तनाव बढ़ सकता है।
क्या करे - माँ अन्नपूर्ण को नमन करे |
क्या न करे- यात्रा न करे |


कन्‍या:- आर्थिक हानि व धनाभाव समक्ष आएगा | शत्रुबाधा भी संभव है |
क्या करे - कार्य की गुप्त बात हर किसी से चर्चा न करे |
क्या न करे- निवेश न करे |

तुला:- व्यर्थ का व्ययभार बढेगा | कार्यक्षेत्र में व्यर्थ की भागदौड़ व तनाव होगा |
क्या करे - खर्च को नियंत्रित करे |
क्या न करे- भागदौड़ न करे |


वृश्चिक:- आर्थिक, व्यापारिक नुक्सान के साथ पारिवारिक तनाव, भेद भाव बढेगा |
क्या करे - सुंदरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ करे |
क्या न करे- किसी का अँधा विश्वास न करे |

धनु:- कला से जुडाव बढेगा व कालाकारो को विशेष लाभ होगा | परिवार में किसी के स्वस्थ्य की चिंता होगी |
क्या करे - विष्णु लक्ष्मी की आराधना करे |
क्या न करे- चिंता न करे


मकर:- आर्थिक लाभ व भौतिक सुखों में वृद्धि होगी, मानसिक तनाव से मुक्त हो सकेंगे |
क्या करे - शिव आराधना फलदाई होगी |
क्या न करे- गलत संगत से बचे |


कुंभ:- विशेष आर्थिक, व्यापारिक, राजीनीतिक लाभ मिलेगा, चल रहे प्रयास फलदायी होगा। चतुर्मुख लाभ संभव |
क्या करे - भैरव मंदिर में दान करे |
क्या न करे- क्रोध न करे |

मीन:- नई व्यापारिक व निवेश योजनाये फलीभूत होंगी।
क्या करे - विष्णु आराधना करे |
क्या न करे- लौह, धातु निर्मित औजार तथा वाहन का प्रयोग सावधानी से करे |