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Thursday, June 30, 2011

भैरव साधना का अद्भुद चमत्कार

यदि आप किसी गंभीर समस्या में घिर जाये और चाहते हो त्वरित उपाय तो एक ऐसा उपाय जो जीवन पर छाए काले बादल को तुरंत मिटाए

- शनिवार और रविवार को श्री भैरव मंदिर में जाकर सिंदूर व चमाली के तेल का चोला अर्पित करे |
- शनिवार या रविवार को भैरव मंदिर में कपूर की आरती व काजल का दान करने से कष्ट मिटते है |
- किसी गंभीर समस्या के निवारण हेतु उरद की दाल के एक सो आठ बारे बना कर उसकी माला बनाये और श्री भैरवनाथ जी को अर्पित कर सदर उनकी आरती करे |
- पारिवारिक या न्यायिक विवाद के निदान हेतु सरसों का तेल, खोये से निर्मित मिस्ठान, काले वस्त्र, एक जलदार नारियल, कपूर, नीबू आदि समर्पित करे |
- उपरी बाधा निवारण हेतु भैरवाष्टक का नियमित आठ पाठ कर जल को फुक कर पीड़ित व्यक्ति को पिला दे | हर प्रकार की समस्या का निदान होगा |

पांच मिस्ठान करेगी चमत्कार

जब व्यक्ति किसी गंभीर समस्या में घिर जाये, जीवन में आगे बढ़ने का कोई मार्ग न दिखे, भविष्य अन्धकारमय दिखने लगे जब सारे मार्ग बंद हो जाये तो इस प्रयोग को करे |

यह प्रयोग बुधवार, शनिवार को मिलाकर कुल 11 बार करे :-

एक स्टील का लोटा लेकर उसमे दूध, जल, शहद, गुड, काला तिल मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर ले | फिर यह मिश्रण ले कर आस पास किसी पीपल के पेड़ पर जा कर पूरी श्रद्धा से अर्पित करे |
फिर वहां पांच अलग अलग प्रकार मिस्ठान पान के पत्ते पर अर्पित कर एक एक इलाइची, लौंग, सुपारी का भोग अर्पित करे और पूरी श्रद्धा से पांच सुगन्धित अगरबत्ती अर्पित कर साथ परिक्रमा पीपल देव की करे |
इस प्रयोग को करने से किसी भी प्रकार की बाधा होगी वह दूर हो जाएगी और आप सफलता का वरण कर सकेंगे |

अमरनाथ यात्रा का रहस्य व कथा

पुराणों में संस्मरण है कि एक बार माँ पार्वती ने बड़ी उत्सुकता के साथ बाबा श्री विश्वनाथ देवाधिदेव माहदेव से यह प्रश्न किया की ऐसा क्यूँ होता है की आप अजर अमर है और मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरुप में आकर फिर से वर्षो की कठोर तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना होता है | जब मुझे आपको ही प्राप्त करना है तो फिर मेरी यह तपस्या क्यूँ...? मेरी इतनी कठोर परीक्षा क्यूँ....? और आपके कंठ में पड़ी यह नरमुण्ड माला तथा आपके अमर होने का कारण व रहस्यक्या है...? महाकाल ने पहले तो माता को यह गूढ़ रहस्य बताना उचित नहीं समझा परन्तु माता की स्त्री हठ के आगे उनकी एक न चली | तब अन्त्त्वोगत्व्या महादेव शिव को माँ पार्वती को अपनी साधना की अमर कथा जिसे हम अमरत्व की कथा के रूप में जानते है इसी परम पावन अमरनाथ की गुफा में कही | अमरनाथ यात्रा हिन्दी मास के आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास की पूर्णिमा तक होती है, जो अंग्रेजी माह जुलाई से अगस्त तक लगभग ४५ दिन तक चलती है। भगवान शंकर ने माँ पार्वती जी से एकान्त व गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनने को कहा जिससे कि अमर कथा को कोई भी जीव, व्यक्ति और यहां तक कोई पशु-पक्षी भी न सुन ले। क्योंकि जो कोई भी इस अमर कथा को सुन लेता, वह अमर हो जाता। इस कारण शिव जी पार्वती को लेकर किसी गुप्त स्थान की ओर चल पड़े। सबसे पहले भगवान भोले नें अपनी सवारी नन्दी को पहलगाम पर छोड़ दिया, इसीलिए बाबा अमरनाथ की यात्रा पहलगाम से शुरू करने का तात्पर्य या बोध होता है। आगे चलने पर शिव जी ने अपनी जटाओं से चन्द्रमा को चंदनवाड़ी में अलग कर दिया तथा गंगा जी को पंचतरणी में और कंठाभूषण सर्पों को शेषनाग पर छोड़ दिया, इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा। आगे की यात्रा में अगला पड़ाव गणेश टॉप पड़ता है, इस स्थान पर बाबा ने अपने पुत्र गणेश को भी छोड़ दिया था, जिसको महागुणा का पर्वत भी कहा जाता है। पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी त्याग दिया। इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को भी अपने से अलग कर दिया। इसके बाद मां पार्वती संग एक गुप्त गुफा में प्रवेश कर गये। कोई व्यक्ति, पशु या पक्षी गुफा के अंदर प्रवेश कर अमर कथा को न सुन सके इसलिए शिव जी ने अपने चमत्कार से गुफा के चारों ओर आग प्रज्जवलित कर दी। फिर शिव जी ने जीवन की अमर कथा मां पार्वती को सुनाना शुरू किया। कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई और वह सो गईं जिसका शिव जी को पता नहीं चला. भगवन शिव अमर होने की कथा सुनाते रहे | इस समय दो सफेद कबूतर श्री शिव जी से कथा सुन रहे थे और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे. शिव जी को लग रहा था कि माँ पार्वती कथा सुन रही हैं और बीच-बीच में हुंकार भर रहीं हैं. इस तरह दोनों कबूतरों ने अमर होने की पूरी कथा सुन ली. 
कथा समाप्त होने पर शिव का ध्यान पार्वती की ओर गया जो सो रही थीं | शिव जी ने सोचा कि पार्वती सो रही हैं तब इसे सुन कौन रहा था | तब महादेव की दृष्टि तब कबूतरों पर पड़ी, महादेव शिव कबूतरों पर क्रोधित हुए और उन्हें मारने के लिए तत्पर हुए | इस पर कबूतरों ने शिव जी कहा कि हे प्रभु हमने आपसे अमर होने की कथा सुनी है यदि आप हमें मार देंगे तो अमर होने की यह कथा झूठी हो जाएगी | इस पर शिव जी ने कबूतरों को जीवित छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप निवास करोगो | 

अत: यह कबूतर का जोड़ा अजर अमर हो गया। माना जाता है कि आज भी इन दोनों कबूतरों का दर्शन भक्तों को यहां प्राप्त होता है | और इस तरह से यह गुफा अमर कथा की साक्षी हो गई व इसका नाम अमरनाथ गुफा पड़ा। जहां गुफा के अंदर भगवान शंकर बर्फ के प्रकृति द्वारा निर्मित शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। पवित्र गुफा में मां पार्वती के अलावा गणेश के भी अलग से बर्फ से निर्मित प्रतिरूपों के भी दर्शन करे जा सकते हैं। इस पवित्र गुफा की खोज के बारे में पुराणों में भी एक कथा प्रचलित है कि एक बार एक गड़रिये को एक साधू मिला, जिसने उस गड़रिये को कोयले से भरी एक बोरी दी। जिसे गड़रिया अपने कन्धे पर लाद कर अपने घर को चल दिया। घर जाकर उसने बोरी खोली। वह आश्चर्यचकित हुआ, क्योंकि कोयले की बोरी अब सोने के सिक्कों की हो चुकी थी। इसके बाद वह गड़रिया साधू से मिलने व धन्यवाद देने के लिए उसी स्थान पर गया, जहां पर वह साधू से मिला था। परंतु वहां पर उसे साधू नहीं मिला, बल्कि उसे ठीक उसी जगह एक गुफा दिखाई दी। गड़रिया जैसे ही उस गुफा के अंदर गया तो उसने वहां पर देखा कि भगवान भोले शंकर बर्फ के बने शिवलिंग के आकार में स्थापित थे। उसने वापस आकर सबको यह कहानी बताई। और इस तरह भोले बाबा की पवित्र अमरनाथ गुफा की खोज हुई और धीरे-धीरे करते दूर-दूर से भी लोग पवित्र गुफा एवं बाबा के दर्शन को पहुंचने लगे जो आज तक प्रतिवर्ष जारी है |

श्री अमरनाथ जी के दर्शन से लाभ:-
बाबा अमरनाथ दर्शन का महत्व पुराणों में भी मिलता है। पुराण अनुसार काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देनेवाले श्री अमरनाथ के दर्शन है।

घोड़े की नाल के दस चमत्कारी प्रयोग

घोड़े की नाल के दस प्रयोग :-

काले घोड़े की नाल एक ऐसी वास्तु है जो शनि समबधित किसी भी पीड़ा जैसे शनि की अशुभ दशा, ढैया, साढ़ेसाती शनि का कोई अशुभ योग आदि..हर पीड़ा में सामान रूप से चमत्कारी है बशर्ते यह पूर्ण रूपेण सिद्ध हो....यहाँ सिद्ध से आशय पहले काले घोड़े के प्रयोग में हो फिर शुभ महूर्त में शनि मंत्रो से व वैदिक प्रक्रिया द्वारा प्रतिष्ठित की गई हो | सिद्ध या उर्जावान काले घोड़े की नाल को परखने का एक बहुत ही प्रमाणिक तरीका है | उसे आप कुछ घंटो (कम से कम ५ से ८ घंटे) के लिए मक्के में रख दिया जाये और फिर जब कुछ समय बाद देखा जाये तो सही सिद्ध घोड़े की नाल उस मक्के को लावे में बदल चुकी होगी अर्थात उसे पका देगी....|

१- काले वस्त्र में लपेट कर अनाज में रख दो तो अनाज में वृद्धि हो |
२- काले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रख दो तो धन में वृद्धि हो |
३- अंगूठी या छल्ला बनाकर धारण करे तो शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिले |
४- द्वार पर सीधा लगाये तो दैवीय कृपा मिले |
५- द्वार पर उल्टा लगाओ तो भूत, प्रेत, या किसी भी तंत्र मंत्र से बचाव हो |
६- शनि के प्रकोप से बचाव हेतु काले घोड़े की नाल से बना छल्ला सीधे हाथ में धारण करें।
७- काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर में चारो पायो में लगा दे |
८- काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के घर के चारो कोने पे लगाये |
९- काले घोड़े की नाल से एक कील बनाकर सवा किलो उरद की दाल में रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे |
१०- काले घोड़े की नाल से एक कील या छल्ला बनवा ले, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर कर है छल्ला या कील डाल कर अपना मुख देखे और पीपल के पेड़ के नीचे रख दे | 

Sunday, June 19, 2011

क्या है वायव्य कोण के वास्तु दोष का सटीक, प्रमाणिक उपाय....?


वायव्य कोण पर वरुण देव का पूर्ण अधिकार है | इस स्थान का सीधा सम्बन्ध घर में भूतल पर वायु व जल से प्रभाव से है | इसलिए घर में जल भण्डारण हेतु सभी टंकियां इस स्थान पर रखने का निर्देश प्राप्त होता है | उसके आलावा यह स्थान मेहमानों का कक्ष, विवाह योग्य कन्या का कक्ष, घर के बड़े बेटे - बहु का कक्ष, अन्न भण्डार, स्टोर, वाहन तथा पशु का स्थान, आगंतुक कक्ष (ड्राइंग रूम) आदि बनाना शास्त्र सम्मत है |  

- पूर्णिमा की रात्रि चावल - दूध की खीर बनाकर चन्द्रदेव को समर्पित कर व ब्रह्मण को दान कर स्वयं ग्रहण करे |  
- चन्द्र व गंगाधारी महादेव शिव, वरुणदेव अथवा चंद्र के मंत्रों का जप तथा हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धापूर्वक करें।
- वायव्य क्षेत्र में (स्वाति जल) वर्षा का जल किसी कांच की हरी या नीली बोतल में भर कर रखना चमत्कारिक लाभ देता है |
- इस दिशा में एक छोटा फव्वारा या कृतिम मछलीघर जिसमे आठ सुनहरी मछलियाँ व एक काली मछली हो वह स्थापित करें।

- अपनी मां का यथासंभव आदर करें, सुबह उठकर उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें और शुभ अवसरों पर उन्हें खीर खिलाएं।
- किसी तीर्थ या धार्मिक महत्व्य के जलस्थान, नदी में पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव का ध्यान कर दूध का अर्घ देना तत्काल लाभ देता है |
- वायव्य दिशा के दोष निवारण हेतु घर के पूजा स्थान में प्राण-प्रतिष्ठित मारुति यंत्र, सोम यन्त्र एवं चंद्र यंत्र की स्थापना कर पूजन करें।
- यदि इस स्थान पर किसी भी प्रकार का दोष हो तो वहां मारुतिनंदन श्री हनुमान या श्री शिव जिन्होंने मस्तक पर चन्द्र व जटा में माँ गंगा को धारण किया है को स्थापित करे |

कैसे करे नैऋत्य दिशा के गंभीर वास्तु दोष का उपाय.....?




नैऋत्य (दक्षिण - पश्चिम का कोना) कोण वास्तु में राहु केतु की दिशा बताई गई है | नैऋत्य कोण के बढ़े होने से असहनीय स्वस्थ्य पीड़ा व अन्य गंभीर परेशानियां पैदा होती हैं और यदि यह खुला रह जाये तो ना ना प्रकार की समस्या घर कर जाती है इसलिए इस स्थान का किसी भी परिस्थिति में खुला या बढ़ा हुआ नहीं होना चाहिए | गलती से भी इस कोने में कोई बोरिंग, गड्ढा नहीं होना चाहिए | सदैव ही इस स्थान का ऊँचा होना, भारी होना बहुत ही आवश्यक है | यह स्थान घर के वरिष्ट व्यक्ति का स्थान होता है | इस स्थान में दोष होना घर पर प्रेत बढाओ व शक्तियों को भी आमंत्रित करता है तथा परिवार के जो पितृ देवता है उनकी भी कृपा नहीं मिलती अथवा यह पितृदोष का भी सूचक है | यदि नैऋत्य में किसी भी प्रकार का दोष है तो निम्न उपाय बहुत ही लाभकारी होंगे :- 

- राहु यंत्र की प्राण - प्रतिष्टा कर स्थापना विधिपूर्वक करें।
- पितृपक्ष अथवा कृष्णपक्ष की चतुर्दशी व अमावस्या विधिपूर्वक पूरी श्रद्धा से श्राद्धकर्म का संपादन कर अपने पूर्वजों को संतुष्ट कर कृपा ले |
- वास्तु दोष निवारण यन्त्र की विधिपूर्वक पूरी श्रद्धा से प्राण - प्रतिष्टा कर स्थापना करना भी नैऋत्य दिशा के दोष को दूर करने के अत्यंत लाभकारी है |

- राहु - केतु के मंत्रों का जप स्वयं करें अथवा किसी योग्य ब्राह्मण से कराएं एवं इनसे सम्बंधित दान किसी दरिद्रनारायण को नियमित करे तो निश्चित लाभ होगा |    
- पूरे कुटुंब के साथ महादेव शिव का दुग्धाभिषेक करे तथा महादेव को कांस्य, रजत या स्वर्ण निर्मित नाग - नागिन का जोड़ा अर्पित कर उसे नैऋत्य दिशा में स्थापित करे |